भारतीय क्रिकेट में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। आईपीएल में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पहचान बनाने के बाद अब उन्होंने दलीप ट्रॉफी में भी ऐसा असर छोड़ा है कि पूर्व भारतीय दिग्गज कृष्णमाचारी श्रीकांत भी उनके मुरीद हो गए हैं।
श्रीकांत ने बताया कि वैभव को बल्लेबाजी करते देखने के लिए उनकी पत्नी भी दलीप ट्रॉफी का मैच देख रही थीं।
वैभव की बल्लेबाजी ने खींचा दिग्गजों का ध्यान
वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में जिस तरह की निडर बल्लेबाजी दिखाई है, उसने क्रिकेट फैंस के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ाई है। आईपीएल के बाद अब घरेलू क्रिकेट में भी उनकी पारियां दर्शकों और पूर्व क्रिकेटरों का ध्यान खींच रही हैं। दलीप ट्रॉफी में उनकी बल्लेबाजी देखने के लिए सामान्य तौर पर कम रुचि रखने वाले दर्शक भी मैच से जुड़ रहे हैं।
श्रीकांत बोले- मेरी पत्नी भी देख रही थी मैच
पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज कृष्णमाचारी श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर वैभव सूर्यवंशी की लोकप्रियता का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पत्नी दलीप ट्रॉफी का मुकाबला देख रहे थे और इसकी एक बड़ी वजह वैभव की बल्लेबाजी थी। उनके मुताबिक वैभव जब मैदान पर आते हैं तो लोगों का ध्यान अपने आप मैच की तरफ चला जाता है।
श्रीकांत का यह बयान बताता है कि वैभव ने इतनी कम उम्र में किस तरह क्रिकेट प्रेमियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और गेंदबाजों पर दबाव बनाने की क्षमता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।
81 गेंदों में 92 रन, फिर शतक से चूके
दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में वैभव ने सेंट्रल जोन के खिलाफ शानदार पारी खेली। उन्होंने महज 81 गेंदों में 92 रन बनाए। हालांकि एक बार फिर वह शतक के बेहद करीब पहुंचकर अपना विकेट गंवा बैठे। उनकी इस पारी ने टीम को फाइनल में पहुंचने की राह में अहम योगदान दिया।
वैभव के बार-बार 90 के आसपास पहुंचकर शतक से चूकने पर श्रीकांत ने मजाकिया अंदाज में उनकी तुलना अपने रिकॉर्ड से भी की। उन्होंने युवा बल्लेबाज की तारीफ करते हुए कहा कि शतक के करीब पहुंचकर आउट होने के मामले में वैभव उनसे भी आगे निकलते नजर आ रहे हैं।
कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभाली
वैभव के प्रदर्शन की खास बात सिर्फ उनकी बल्लेबाजी नहीं रही। ईस्ट जोन के नियमित कप्तान ईशान किशन के मैदान से बाहर होने के बाद इस युवा खिलाड़ी ने कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभाली। इतनी कम उम्र में टीम का नेतृत्व करना अपने आप में बड़ी चुनौती थी, लेकिन वैभव ने दबाव के बीच टीम को संभालते हुए फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
श्रीकांत ने भी माना कि शुरुआत में उन्हें संदेह था कि इतनी कम उम्र का खिलाड़ी टीम की कप्तानी किस तरह करेगा। लेकिन वैभव ने अपने प्रदर्शन और नेतृत्व से उन सवालों का जवाब मैदान पर दे दिया। दलीप ट्रॉफी में उनका यह नया रूप उनके क्रिकेट करियर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
कम उम्र में लगातार बना रहे हैं बड़ी पहचान
वैभव सूर्यवंशी के लिए पिछले कुछ समय में क्रिकेट के अलग-अलग मंचों पर लगातार नई चुनौतियां सामने आई हैं। आईपीएल की तेज-तर्रार क्रिकेट से लेकर घरेलू फर्स्ट क्लास मुकाबलों तक उन्होंने अपने आक्रामक अंदाज को बरकरार रखा है। अब उनकी बल्लेबाजी के साथ कप्तानी की चर्चा भी होने लगी है।
15 साल की उम्र में दिग्गज क्रिकेटरों का ध्यान अपनी ओर खींचना वैभव की खास उपलब्धि है। आने वाले समय में उनकी तकनीक, निरंतरता और दबाव में प्रदर्शन पर नजर रहेगी, लेकिन फिलहाल उनकी बेखौफ बल्लेबाजी ने क्रिकेट जगत में उम्मीदों को जरूर बढ़ा दिया है।